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मेरी कहानी मेरी जुवानी
08-07-2014, 12:32 AM
Post: #1
मेरी कहानी मेरी जुवानी


मैं एक इंजिनियर हूँ… अच्छी कंपनी में अच्छी नौकरी करता हूँ .. मेरा अच्छा खासा परिवार है , मुझ से प्यार करने वाली पढ़ी लिखी पत्नी है , दो सुंदर और मुझे जान से प्यारी बेटियां हैं ..अब तो दोनों की शादी हो चुकी है .उनका अपना परिवार है …
शुरू के कुछ दिन तो नयी जगह और नयी पोस्टिंग में अपने को adjust करने में निकल गए ! समय कैसे बीत गया कुछ पता ही नहीं चला .बीबी की याद तो आती थी पर उसका कुछ खास असर नहीं होता था .. काम की मसरूफियत में सब कुछ भूल जाता था ! अकेलापन कभी कचोटता नहीं .. सुबह जल्दी निकल जाता था और घर वापस आते काफी रात हो जाती थी … नौकर खाना बना कर टेबल पर लगा कर चला जाता था , पास में ही servant quarter था , वहीं रहता था , रामू , मेरा नौकर !
करीब एक महीने तक ऐसा ही चलता रहा ..और फिर जब धीरे धीरे मैंने वहां का काम संभाल लिया .. काम कम होता गया और मेरे पास समय की कमी या काम का बोझ नहीं रहा ! शाम को अब मैं घर जल्दी अ जाता था ..पर अकेलापन मानो पहाड़ जैसे लगता था .. बीबी की याद आती … समय काटे नहीं कटता .. उन दिनों मोबाइल और std जैसी सुवुधाएं भी नहीं थीं I घर में telephone था , पर STD की सुविधा नहीं थी इसलिए trunk कॉल करना पड़ता था ..और आपको मालूम होगा trunk कॉल से बात करना भी अपने आप में भारी मुसीबत होती थी … ऐसे में अकेलापन और भी कचोटता था ..!
मैं वहां का senior most ऑफिसर था इसलिए बाकि junior ओफ्फिसर्स से ज्यादा घूल मिल भी नहीं सकता .. शहर भी छोटा था , समय बीताने के कुछ और साधन भी नहीं थे ..बस ऑफिस , और घर और कभी कभी पिक्चर देख लेता था वहां के एक लौते हाल में !
इसी अकेलेपन ने मुझे एक अजीब मोड़ पे ला कर खड़ा कर दिया ..मैं एक ऐसे रास्ते पर चल पड़ा जो अनजान होते हुए भी ऐसा लगा मेरे हमसफ़र नए नहीं .. मेरे जाने पहचाने ..मेरे करीबी , मेरे बिलकुल अपने .. जब की किसी से भी मेरी कभी मुलाकात नहीं हुई … इस नए मोड़ ने , इस नयी राह ने और इस सफ़र के हम सफ़र ने मेरी जिंदगी को झकझोर दिया ..!
मैं ऐसे दो राहे पर था जहाँ पीछे थी मेरी जिंदगी और सामने था मेरा दिल .. !
मैं यहाँ बता दूं मुझे सब सागर साहेब कह कर बुलाते हैं…मेरा नाम कुलदीप सागर है ! और हाँ मुझे पान खाने का बड़ा शौक है ..खाना खाने के बाद लंच हो या डिनर मुझे पान जरूर चाहिए ..मेरे पानवाले को मालूम है मुझे कैसा पान पसंद है .मेरे जाते ही मेरे पसंद का पान बड़े प्यार से लगा कर देता था .! उस से काफी अच्छी पहचान हो गयी थी और हम लोग काफी घूल मिल भी गए थे ..उसे मालूम था की मैं यहाँ अकेला ही रहता हूँ I

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08-07-2014, 12:33 AM
Post: #2
एक दिन की बात है …मुझे अपनी बीबी की बहोत याद आ रही थी ..मैं काफी उदास था … डिनर के बाद उसी उदास मूड में ही पान खाने निकला ..सोचा बाहर घूम आऊं .थोडा दिल बहल जायेगा .. पानवाले ने मुझे देख कर कहा :” लगता है साहब का आज मूड कुछ ढीला है ..”

मैंने कहा ” हाँ यार ढीला तो है ..बस तुम आज ऐसा पान बनाओ मूड tight हो जाये …! “
उसने जवाब दिया ” साहब कब तक सिर्फ पान से मूड tight करोगे ..?? मूड तो आपका tight हो भी गया तो क्या ? आप के अन्दर वाला तो ढीला ही रहेगा ..! ” और जोरों से हंस पड़ा !!
” क्या मतलब ..??’ ” मैं जरा serious होता हुआ बोला !

पानवाला कोई कच्चा खिलाडी नहीं था , जल्दी हार मानने वाला नहीं !
उसने कहा ” क्यों बनते हो साहब ? आप कहो तो आपके अकेलेपन का इलाज कर दूं ??”
तब तक मेरा पान लग चूका था ..यह सब बातें उस ने पान लगाते लगाते ही कहा ..
मैंने उस के हाथ से पान ली .मुंह में डाला और कहा ” देखो यार मैं समझता हूँ तुम क्या कहना चाह रहे हो .पर फिर भी ..”

“सोच लो साहेब ..कोई जल्दी नहीं .. बस इतना समझ लो मेरे पास शर्तिया इलाज है ..!”
मैं उस की ओर पान चबाता हुआ देखा , मुस्कुराया और कहा ” ठीक है ठीक है …अभी मेरा मर्ज़ ला इलाज नहीं ..यार जब उस हालत पे होगी तो देखा जायेगा .”

पानवाले ने भांप लिया … उस ने पहली बाज़ी जीत ली थी !
काश मैं उस दिन उस से ज्यादा बातें नहीं की होती ….. !!!!
पान का आनंद लेते हुए मैं घर वापस आ गया .थोड़ी देर टीवी देखा , फिर बिस्तर पर लेट गया …पर नींद तो आज कोसों दूर थी ..मैं करवटें लेता रहा , पर सो नहीं पाया ..एक अजीब भारीपन .. मन में उदासी , बेचैनी , तड़प ..बड़ा ही अजीब माहौल था I किसी को बाँहों में ले कर , उसे अपने से चिपका कर एक जोरदार किस करने का मन करता .. कभी मन करता किसी की चूत फैला कर उसकी गुलाबी फांकों को अपने होठों से चूस लूं .. उन्हें ऊपर नीचे चाटता रहूँ , जब तक उसकी चूत से पानी की धार न बह जाये …फिर अपने तने हुवे लंड को अन्दर पेल दूं ..लगातार ,बार बार उसकी चूतडों को ऊपर उछाल उछाल कर चोदता रहूँ … यह सब सोचते सोचते मेरा लौड़ा एक दम टून्न हो गया ..७ इंच और मुठी भर का लौड़ा , जो मेरी बीबी के हाथों में भी समां नहीं पाता , वोह दोनों हतेलियों से उसे सहलाती थी .. और बड़े प्यार से उसे मुंह में ले कर चूसती थी .. पर अभी बेचारा बीना किसी सहारे के फूंफकार रहा था , उसकी मजबूरी कोई सुनने वाला नहीं था .. मैंने अपने लौड़े अपनी मुठी में लिया और सहलाने लगा .थोडा अच्छा लगा … और भी टन्ना गया , जैसे अपने जड़ से उखड ही जायेगा …मुझ से रहा नहीं गया .मैंने अपने सब से मुलायम तकिये से अपने लंड को , करवट ले कर , बिस्तर से दबा दिया , और अपने कमर हीला हीला कर लंड को तकिये और बिस्तर के बीच रगड़ने लगा …आः ..कुछ राहत मिली , मैंने जोरदार धक्के लगाने शुरू कर दिए ..जैसे किसी की चूत फाड़ने जा रहा हूँ …आः ..ऊऊह्ह , सही में बड़ा मजा आ रहा था … धक्के की रफ़्तार बढती गयी … मेरा लौड़ा जैसे छील ही जानेवाला हो . पर मैंने ध्यान नहीं दिया , लगातार धक्के लगता रहा ..लगाता रहा और फिर ….मेरे लंड से पिचकारी की तरेह वीर्य निकल पड़ा … झटके के साथ मैं झाड़ता रहा .. चादर और तकिया पूरी तरेह गीली हो गयी .चिपचिपी हो गयी ..पर मन शांत हो गया ..थोडा शुकून मिला ,, चूत न सही पर लौड़े को कोई जगह तो मिली , रगड़ने को !
और थोड़ी देर हांफते हुए लेट गया … नींद कब आ गयी मुझे पता ही नहीं चला .. !
सुबह उठते ही मेरी नज़र गीले तकिये और चादर पर गयी ..जो अब सूख गया था और पपड़ी जमी थी वहां ..
पर आखिर कब तक ..??
मैंने मन बना लिया अब कुछ करना है … कुछ शर्तिया इलाज करानी है लौड़े की बीमारी का ….
और ऑफिस जाते जाते मैं ने पानवाले की तरफ अपनी कार मोड़ दी ……
कार मैंने पान दूकान के पास रोक दी , और उतर कर दूकान के पास गया …कुछ खास भीड़ नहीं थी , पर फिर भी कुछ लोग वहां थे .. मोहन ने (पानवाला) मुझे देख सलाम ठोंका और कहा .” बस इन्हें जरा निबटा लूं “, सामने खड़े ग्राहकों की ओर इशारा किया ! “कोई बात नहीं , आराम से ..मुझे भी आज जल्दी नहीं और मैं खड़ा रहा अपनी बारी की इंतज़ार में I
छोटे शहर में रहने के बहोत फायदे हैं तो सब से बड़ा नुकसान भी है के कोई भी बात बहोत जल्दी फैल जाती है , सब एक दूसरे को जानते हैं .इसलिए मोहन के शर्तिया इलाज से मैं जरा घबडा रहा था , कहीं बदनामी न हो जाये . और पता नहीं कैसी जगह और किस रंडी के यहाँ मुझे भेज दे .. बीमारी का डर भी था , मैं काफी उधेड़ बून में था , उसे कहूं या न कहूं ..?? कहीं एक बीमारी के इलाज में दूसरी कई बीमारियों का शिकार न हो जाऊं..
और इधर हमारे मोहन भाई दनादन हाथ मारते हुए अपने सभी ग्राहकों को फटाफट निबटाया , फिर पानी से अपने हाथ धोये और मेरे लिए पान के चार सब से अछे पत्ते चूने , उन्हें कैंची से बड़ी सावधानी से कुतरते हुए मेरे से कहा ” सागर साहेब , आप मेरे स्पेशल ग्राहक हो , आपको जनता छाप पान कैसे दूं ..?? आप के लिए जरा सफाई से ही काम करना पड़ता है न .. और सुनाइए ..कुछ इलाज़ के बारे सोचा आपने ?? ” और ये कहते हुए उस ने आँख मारी और जोरों से हंस पड़ा !!
“यार इलाज़ तो चाहिए .. पर गुरु तुम कुछ ऐसी वैसी जगह तो नहीं भेज रहे मुझे ..?? ” यह कहते हुए मैंने अपने अगल बगल देखा ..कोई नहीं था उस वक्त वहां ..
उस ने पान लगाते हुए कहा ” क्या बात कर रहे हो साहेब ..जैसे पान आपका स्पेशल छांटता हूँ मैं .आपके लिए वैसी ही स्पेशल चीज़ भी चुन रखी है .. बस एक बार आजमा के तो देखो साहेब .. अपना हथियार आप उस के अन्दर से निकालना ही नहीं चाहोगे … ” और फिर जोरों से हंस पड़ा … !!
“ऐसी बात है ..?? ” मैंने पूछा.
“बिलकुल ..एक दम चुम्बक है सर , उस के साथ आप ऐसे चीपकोगे जैसे शहद से मक्खी .. पूरे का पूरा चूस लो .. ‘ उसकी बातों से मेरा मन भी डोल गया …और मैं मीठे शहद की कल्पना में खो गया …”ये शाला है बड़ा चालू , लगता है मेरी इलाज कर के रहेगा ..” मैंने सोचा . शहद चूसने की बात से मेरे पैंट के अन्दर कुछ हलचल सी हुई ..
तब तक मोहन पान लगा चूका और एक पान मुझे थमाया और बाकि के तीन पैक कर दिया मेरे ऑफिस के लिए ! पान मैंने मुंह में दबाया और बोला… ” देख यार बातें तो तू बड़ी बड़ी कर रहा है ..पर सही में सब कुछ वैसा ही है जैसा तू बता रहा है.. ??”

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08-07-2014, 12:34 AM
Post: #3


” आप से मैं झूटी बात क्यूं करूंगा सर ..?? मुझे क्या आप से अपना रिश्ता तोडना है ..?? मैं इतना घटिया इंसान नहीं हूँ सागर साहेब ..एक बार चीज़ को चख तो लो साहेब ..अगर पसंद नहीं आये तो चार जूतियाँ मारना मुझे … “
उसकी इन बातों से मैं काफी इम्प्रेस हो गया ..” चलो “, मैंने सोचा , ” एक बार ट्राई मारने में क्या हर्ज़.. ये शाला झूठ बोल कर जायेगा कहाँ ..?? “
“ठीक है .. बोलो क्या करना है और कब ..??” मैं ने अपनी रजामंदी दे दी !!
मोहन की आँखों में चमक आ गयी …उस ने कहा ” शुभ काम में देर किस बात की ..मैं आज शाम के लिए सब सेट कर देता हूँ .. अगर पसंद आ गयी तो बस रात भर का इंतज़ाम हो जायेगा … “
“ठीक है . “”
और मैं पान का पैकेट ले कर अपनी कार की ओर चल पड़ा .. कार स्टार्ट की और ऑफिस पहुँच गया ..!
दिन भर मैं शाम की रंगीनियों के बारे सोचता रहा ..कैसी रहेगी ..?? इस तरेह की चुदाई का ये मेरा पहला मौका था … मेरा रोम रोम सीहर उठा .. एक रोमांच सा दिल में होने लगा ..जैसे तैसे काम निबटा क़र घर पहुंचा . हाथ मुंह धो कर फ्रेश हुआ .थोडा हल्का सा नाश्ता किया और चल पड़ा आज के adventure की तरफ .. मोहन के पान दूकान की ओर..
ये मेरी बर्बादी या आबादी (?) की ओर पहला कदम था …!
आखिर मोहन की मीठी बातों ने असर दिखाया और मैं चल पड़ा अपने लौड़े की शांति के लिए उसकी दूकान की ओर ..
मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे और साथ में कुछ घबडाहट भी थी ..पता नहीं शाला कैसी माल दिखायगा.. कोई ऐसी वैसी रंडी होगी ..जो शाली अपनी चूत खोल और फैला के लेट जाएगी .. और चूत कम भोंसडा ज्यादा होगा .. फिर मज़ा क्या आयेगा ..उस से अच्छा तो अपना तकिया रगड़ना है .. खैर अब जब ओखल में सर दिया तो मूसल का क्या डर ..चल बेटा कुलदीप सागर .. लगा शाली चूत की सागर में गोते … कुछ मोती तो मिल ही जायेंगे ..हा हा हा !! इन्ही सब सोच में मेरी कार दूकान के पास आ गयी ..मैंने दूकान से थोड़ी दूर पर कार रोकी और चल पड़ा मोहन की तरफ ..
उसकी दूकान पर कुछ लोग थे .. इसलिए मैं वहां पहुंचते ही चुपचाप एक कोने में खड़ा हो गया ..मोहन ने मुझे देख लिया और एक हलकी मुस्कान दी और कहा ” बस सर ..थोडा वेट कीजिये न ..मैं इन्हें निबटाया और आपको पान खिलाया ..” और उस ने धीरे से आँख भी मार दी …
मैं भी उसके जवाब में मुस्कुरा दिया ..
थोड़ी देर बाद एक शख्श को छोड़ बाकि सभी चले गए .. इसलिए मैं आगे तो बढा पर उस शख्श की ओर शक की निगाह से देखा .. मोहन मेरे मन की बात भांप गया और तुरंत बोला ” सर यह हमारे करीबी गोपाल सिंह हैं …आज आप के काम की जिम्मेदारी इन्ही की है .. ” और गोपाल की ओर मुखातिब हो कर उस से कहा ” अरे भैय्या गोपाल , ये हमारे सागर साहेब हैं ..हमारे बहोत ही खास ,,आज इनकी खातिरदारी में कोई कमी नहीं होनी चाहिए ..बेटा अगर इनसे कोई शिकायत हुई तो फिर तू जानता है न तेरा क्या हश्र होगा ..” और जोरों से हंसने लगा I
मोहन का पान लगाना और बातें करना दोनों हमेशा साथ ही होते हैं… हँसते हुए उस ने मेरी ओर पान बढाया और कहा ” ई पान भी आज स्पेशल है साहेब , आप भी क्या याद रखेंगे .. पान खाइए और गोपाल के साथ जाइये ..लूटिये मज़े .. बेफिकर .. ” और एक और जोरदार ठहाका .. !
मैंने मुंह में पान डाला और गोपाल से कहा ” चलो बैठो मेरी कार में , कहाँ जाना है ..?? ”
पर गोपाल ने मेरी कार की ओर ऐसे देखा जैसे कोई मालगाड़ी हो.. और उसमें बैठना उस की इज्जत के खिलाफ है I
मैं पूछा”क्या हुआ , कार देख कर घबडा क्यूं गए यार ..? छोटी है क्या ..??”
” अरे नहीं नहीं , साहेब बात दर असल ये है .. मैं जहाँ रहता हूँ वहां लोग कार में कम ही आते हैं ..और आज तो काम काफी देर तक चलेगा ..है न ..? और आपकी कार बाहर खड़ी रहेगी ..लोगों को बेकार में शक होगा .. “
” फिर क्या किया जाये ..?? ” मैंने पूछा I
” मेरे पास बाइक है , आप को ऐतराज नहीं तो आप अपनी कार अपने घर छोड़ दें , आपका घर तो पास ही है और बाइक पर चलते हैं .. “
मतलब गोपाल ने मेरे बारे सब कुछ मालूम कर लिया था I
” तुम्हें मेरे घर के बारे कैसे मालूम .. यार तुम तो बड़ी चालू चीज़ हो .?? ” मैंने कहा I
” अब सर इस धंधे में सालों से टीका हूँ ..चालू तो होना ही पड़ेगा ..”
“ठीक है यार मैं समझता हूँ , मैं आगे कार से जाता हूँ , तू मेरे पीछे बाइक ले के आ ..”
और मैं कार अपने गैराज में रखा और गोपाल की बाइक के पीछे हो गया सवार और चल पड़ा अपनी बरबादी या आबादी(?) की ओर I
जैसा की आम ख्याल होता है ऐसी जगहों का ..मेरे दिमाग में भी यही ख्याल था कि गोपाल मुझे तंग और भीड़ भरी गलियों से होता हुआ किसी छोटे से दो या तीन मंजिले मकान के किसी अँधेरे बंद कमरे में ले जायेगा , पर यह तो कोई और ही रास्ता था .. जहाँ हम पहुंचे वो एक साफ सुथरी कालोनी थी .. जैसा कि राज्य सरकार के हाऊसिंग बोर्ड होते हैं ..एक छोटे से बंगलेनूमा घर के बाहर गाड़ी रुकी , गोपाल ने मुझे उतरने को कहा और बोला ” येही है मेरा गरीबखाना , सर . आज आप मेरे खास मेहमान हैं “




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08-07-2014, 12:34 AM
Post: #4


“पर यार …” मैं आगे कुछ बोल पाता के सामने देख मेरी बोलती बंद हो गयी ,मैं एक टक देखता ही रह गया !
सामने एक खूसूरत सांवली लम्बी जवान औरत गेट खोल रही थी .. जवान इसलिए के उसकी उम्र कोई 25 – 26 की होगी और औरत इसलिए के उसके सही जगह बिलकुल सही उभार था ..जैसे किसी शादी शुदा औरत जो अपनी फिगर संभालना जानती हो , का होता है .. न मोटी न दुबली .. बस एक दम ऊपर से नीचे भरी भरी l सांवला रंग होते हुए भी एक अजीब चमक थी ..जो किसी को भी अपनी और खींच ले .. हल्का सा मेक अप और होठों पे हलकी लिप स्टिक …चेहरा कटीला , जैसा किसी मॉडल का होता है… नाक तीखे … मैं बस देखता ही रहा …..
“भारती .. ये हैं सागर साहेब , आज हमारे खास मेहमान … ” गोपाल की आवाज़ से मैं अपनी चकाचौंध से वापस आया और भारती की ओर मुखातिब हुआ ..
भारती ने मुझे मुस्कुराते हुए नमस्कार किया और हमें अन्दर आने का इशारा किया , और हम तीनों घर की ओर चले .. आगे आगे गोपाल उसके पीछे भारती अपनी कुल्हे मटकाती , कमर लचकाती चल रही थी ओर मैं उसे देखता हुआ मन ही मन यह दुआ करता हुआ के आज अगर ये मिल जाय तो बस अपने लौड़े क़ी तो चांदी ही चांदी .. आगे बढ़ रहा था l
उसने टाईट सलवार कमीज़ पहन रखी थी , जिस से उसके जवान बदन का निखार उभर उभर कर मेरे दिल दीमाग और लौड़े पर हथोड़े मार रहा था .. ! क्या गांड थी , और क्या कमर की लचक ..!
हम लोग अन्दर आये ,ये शायद ड्राइंग रूम था गोपाल का ..बड़े करीने से सजा था .. जैसे किसी मध्यम वर्गीय परिवार का होता है …मैं और गोपाल वहीँ सोफे पर अगल बगल बैठ गए और भारती अन्दर चली गयी l
” अरे भाई गोपाल क्या येही जगह है ..?? चलो यार जल्दी से माल के दर्शन कराओ …” मैं कहा l
“अरे सर , अभी तक जिसे आप आँख फाड़े देख रहे थे वोही तो है … !!”
“एएँ .क्या बक रहे हो गोपाल , वो तो तुम्हारी बीबी है न ..?? ….”
” सर आप आज ज्यादा सवाल न करें धीरे धीरे आप सब समझ जाओगे …आज बस आप मस्ती लूटें l अभी वो न किसी की बीबी है न किसी की मां न किसी की बहेन..वो जितनी देर आप यहाँ हो आपकी है , बस आपकी ..आप जैसे चाहे उस से मजे लो .. ” उसने जोरदार ठहाका लगाया ” आप मेरी बात समझ रहे हैं न ..? अब मैं जाता हूँ , काफी थक गया हूँ ..आराम करूंगा , भारती आती ही होगी ..आपका ख्याल रखने …”" उसने मुझे आँख मारी और झट अन्दर चला गया .. !
गोपाल की बातों से मैं अवाक रह गया … कहाँ तो मैं किसी ऐसे वैसे जगह और लड़की के बारे सोच रहा था , और कहाँ एक दम घरेलु , खूबसूरत , सुघड़ और सेक्सी औरत हाथ लग रही है ..मन में झूर्झूरी सी होने लगी .. भारती किसी भी एंगल से ऐसी औरत नहीं लगती थी जो धंधा करती हो ..आखिर क्या मजबूरी थी इस के साथ … ?? फिर मैंने सोचा ” छोड़ यार भारती की मजबूरी .. अभी अपने लौड़े की मजबूरी का ख्याल कर और अपने पैसे की कीमत वसूल , ऐसी माल रोज हाथ नहीं लगती …भारती की मजबूरी आज नहीं तो कल मालूम कर ही लेंगे … “
पर फिर भी … मेरे मन में भारती का रहस्य जानने ने की इच्छा जाग उठी .. और रहस्य तभी जाना जा सकता है जब की उसका दिल जीतो ..और दिल जीतने का सब से सहज तरीका है उसकी चूत … जो मुझे मिल रही है … और फिर भारती को ताबड़तोड़ चोदने के ख्याल से मेरे मन में लड्डू फूटने लगे .पैंट के अन्दर हल चल होने लगी … मैं बेसब्री से उसका इंतज़ार करने लगा ..!
मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे ..एक अजीब मदहोशी छाई थी , एक झुरझुरी सी हो रही थी , जब से भारती के दीदार हुए और मुझे यह पता चला की आज की रात भारती के साथ गुजारनी है ..उसकी मस्त जवानी मेरे क़दमों पे होगी ..उसे मैं अपनी बाँहों में लूँगा … उसे चूमूंगा , चूसूंगा ..चाटूंगा ..आह इसकी कल्पना से ही मेरा लंड फूंफकार रहा था ..मैं मस्ती की आलम में था कि तभी रूम में पर्दा हिलने की सरसराहट हुई ..देखा सामने आज के रात की रानी भारती हाथ में ट्रे लिए अन्दर आ रही है ..
मेरे दिल की धड़कन तेज हो गयी ….. साँस ऊपर की ऊपर ही रह गयी ..सामने का नज़ारा ही ऐसा था ..
भारती मुस्कुराते हुए अन्दर आ रही थी ..हाथ में ट्रे था और बदन पे एक महीन , पारदर्शी नाइटी .. रंग लाल , उसके अन्दर और कुछ नहीं .. सिर्फ उसकी जवानी .. उसकी भरी चूचियां ..उसकी गदरायी जिस्म ..उसके केले के थम्ब जैसी जांघें .. मैं बस देखता ही रहा .. नाइटी का जिप सामने था …
मैं उसे एक टक देख रहा था ,उसकी हर कदम पे उसकी चूचियां हिलती थीं .. मांसल जांघें थरथराती थीं और मेरे दिल की धड़कन तेज़ और तेज़ होती जाती थी ….पूरा कमरा उसकी परफ्यूम
की खुशबू से भर उठा ..बहोत ही हलकी खुशबू थी परफ्यूम की , पर होश उड़ाने के लिए काफी . मैं जैसे किसी और ही दुनिया में खो गया .. मेरे होशोहवास गुम थे ….
भारती मेरे पास आई , मेरी तरफ झुक कर ट्रे टेबल पर रखा .. झूकी भी बेझिझक … उसकी नाइटी का उपरी हिस्सा चूचियों से सरक गया .. चूचियां नंगी हो गयीं ,उसने उन्हें सँभालने की कोशिश किये बगैर मेरे साथ बैठ गयी l
ट्रे में दो ग्लास में पानी था …और एक प्लेट में कुछ बिस्किट और नमकीन थे ..
मैंने सीधा पानी का ग्लास उठाया और एक ही घूँट में पूरा ग्लास खाली कर दिया ..मेरा गला पहले ही भारती कि दीदार से सूख गए थे ….





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08-07-2014, 12:35 AM
Post: #5


“लगता है आपको प्यास जोरों की लगी है ..” भारती के मुंह से यह पहले शब्द थे …
“आपने ठीक ही कहा ..भारती जी , मैं बहोत प्यासा हूँ … “
“ये लो कहाँ तो आप मेरे पास अपनी प्यास बुझाने आये हो और मुझसे आप और जी बोल रहे हो ..” और वो जोरों से खिलखिला उठी ..
उसकी खिलखिलाहट ने मेरी सारी झिझक दूर कर दी ..
मैंने दूसरा ग्लास उठाया , उसकी ओर हाथ बढाया ..और कहा ” चलो भारती , मेरे हाथों से तुम भी अपनी प्यास बुझा लो …”
और उस ने अपने हाथ से मेरे हाथ पकड़ लिए और ग्लास अपने मुंह में लगाते हुए एक घूँट में पूरा ग्लास ख़ाली कर दिया ..ख़ाली ग्लास ट्रे पर रख दिया और फिर जोरों से खिलखिला उठी ..
” क्यों क्या बात हो गयी …जरा मैं भी सुनूं ये खनकती हंसी किस बात पर हुई ..??? “
” आप बात तो बड़ी मजेदार करते है .. काम भी मजेदार होगा .. ” और एक खिखिलाती हुई हंसी फूट पड़ी ..
“देखो भारती तुम अपनी पानी पीने कि हंसी के बारे बताओ न , क्या बात थी ..? और हाँ तुम भी मुझे तुम ही कहोगी … “
“अरे कुछ नहीं .. वो तुम ने कहा न कि तुम्हारे हाथ से मैं अपनी प्यास बुझाऊँ …??”
” तो इसमें हंसी की क्या बात थी ..” मैंने हैरान होते हुए पूछा..
” अरे भोले राजा..मेरी प्यास तुम आज क्या अपने हाथ से ही बुझाओगे..?? ” और फिर दिल खोल कर खिलखिला उठी ..
मैं भी उसकी बातों कि गहराई समझते हुए हंस पड़ा और कहा ” तुम भी कम नहीं हो बातें बनाने में ..आज तो मुकाबला जोरदार है …रानी तुम्हारी प्यास तो मैं अपने किस किस चीज़ से करूंगा बस देखती जाओ …”
“अच्छा ..लगता है आज तुम्हारी तैय्यारी पूरी है ..बैटरी तुम्हारी फुल चार्ज है …ही…ही…ही.. ” और उसकी हंसी के साथ साथ उसकी चूचियां भी ऐसी हिल रहीं थीं जैसे वो भी उसकी हंसी में शामिल हों ..
इस हंसी मजाक ने माहौल को हल्का बना दिया और मेरी पूरी झिझक दूर कर दी भारती ने l
अब मैं उस के बिलकुल करीब आ गया , उसकी जांघें और मेरी जांघें चिपकी थीं ..मैं धीरे धीरे अपनी जांघ से उसकी मांसल जांघ को रगड़ रहा था … और वो भी पूरा साथ दे रही थी .. अब मैंने अपने एक हाथ से उसकी दूसरी जांघ थाम कर सहलाने लगा और दुसरे हाथ से एक चूची कि घुंडी हलके से मसलने लगा …भारती मस्ती में में डूब गयी .उसकी आंखें बंद हो गयीं ..वो हलकी हलकी सिसकारी ले रही थी ..
मैं भी मस्ती में था , मेरा लौड़ा पैंट फाड़ कर बाहर आने की नाकाम कोशिश कर रहा था … अब मैं उसकी दूसरी चूची अपने मुंह में ले कर हलके हलके चूसने लगा .भारती के मुंह से सिसकी निकल गयी .”हाय ..ऊओह …” उसने अपनी उँगलियों से मेरे लौड़े को पैंट के ऊपर से सहलाना चालू कर दिया …मैं भी बेकाबू हो रहा था , मैंने भारती को अपने हाथों से जकड लिया बुरी तरेह , अपने से चिपका लिया और उसके होठों पे अपने होंठ रख दिए ..उसे चूसने लगा गन्ने कि तरह ..भारती सिसकने लगी ..”हाय ऊओह्ह ..इस ..उई मां ….” उसके नाक फड़क रहे थे …. होंठ कांप रहे थे .. मुझे जकड लिया .. और मेरे पैंट कि जिप खोल दी उस ने .. और हाथ अन्दर डाल दिया , underwear के ऊपर से लौड़ा मुट्ठी में लिया और हलके हलके दबाने लगी …”आह ….” .मैं भी मस्ती में आ गया …
मैं उसे चूम रहा था , उसके होंठ चूस रहा था और वो मेरे लौड़े से खेल रही थी , उसे भींच रही थी ..मेरे मोटे लौड़े को भींचने का पूरा मज़ा ले रही थी .. दोनों कराह रहे थे …सिसक रहे थे .. कि तभी उस ने मुझे उठने को इशारा किया ..मेरे लौड़े को जकड़ते हुए … मैंने भी उसके होठों को चूसना और चूचियों को मसलना जरी रखा …दोनों उठ गए …और उस ने सामने रूम कि ओर चलने का इशारा किया ..
हम दोनों एक दूसरे से चिपके हुए उसके बेड रूम कि ओर चल पड़े …अपने खेल को और आगे और मस्ती और मज़े के आलम की ओर बढाने….
मैं लगातार उसका निचला होंठ चूस रहा था ..और वोह मेरे लौड़े को थामे थी , अपनी मुट्ठी से जकड रखा था , और उसे दबाती जा रही थी और साथ में मुझे लौड़े के साथ बेड़ रूम की और खींच रही थी ,, अजीब मस्ती का आलम था , दोनों हांफ रहे थे .. मैं उसे अपने से चिपकाए था ..मेरे लगातार होंठ चूसने से भारती की सांसें अटक रही थी , अपने चेहरे को मेरे होठों से छुडाया..और एक लम्बी सांस ले कर मेरे नीचले होंठ को अपने होंठों से दबाया और जोरों से चूसने लगी और मुझे खींचते हुए बेड़ पर लेट गयी , मैं उसके ऊपर था ,, मैं उसे उसके पीठ से जकड़ा था और अपने सीने से चिपका रखा था .. उसने मुझे धीरे से धक्का देते हुए ऊपर किया और अपनी नाइटी के जिप को एक झटके में खोला , अपने बदन से अलग करते हुए बेड़ के एक कोने में फ़ेंक दिया ,और उसने मेरे पैंट की ओर इशारा किया , मैं अपने हाथ उसकी चूची से हटाया और कमर उठा कर अपने पैंट के बेल्ट को खोला , नीचे किया और घुटनों के नीचे करते हुए पैर बाहर निकाल लिया ….पैंट फर्श पर ढेर हो गया ..भारती ने शर्ट के बटन खोले और मैंने अपने को शर्ट से आजाद किया .. अब भारती बिलकुल नंगी थी और मैं बनियान और underwear में था ..
भारती ने कहा ..”जानू , मेरे आज के राजा.. हमारे बीच का पर्दा तो हटाओ न ..” और मैंने बनियान उतार दी और उसने मेरी चड्ढी कमर से खींच कर पैरों से नीचे कर दिया …अब दोनों बिलकुल नंगे थे ..एक दूसरे को देख रहे थे …मस्ती में हांफ रहे थे … भारती लम्बी ,लम्बी सांसें ले रही थी .. नाक फड़क रहे थे ..मैंने उसे फिर से अपने सीने से चिपका लिया ..मेरे नंगे सीने , बालों से भरे ..उसकी नंगी चूचियों को दबा रहे थे ..उसके हाथ नीचे मेरे तन्नाये लौड़े को सहला रहे थे …और मैं फिर से उसके होंठ चूसने लगा , और उसे और जोरों से अपने सीने से चिपका लिया “आआआअह ..इतने जोरों से ना दबाव राजा , मैं मर जाऊंगी .. ऊओह ..” भारती सिस्कारियां ले रही थी ..मैं ने अपनी जकड ढीली की , पर होंठों का चूसना चालू रखा .. उसके मुंह सेलार मेरे मुंह में लगातार जा रहा था और मैंउसअमृत को पूरे का पूरा गटक रहा था ..अब मैंने अपनी जीभ भी अन्दर डाल दी उसके मुंह में ,उसकी तालू , उसके अन्दर के गाल , उसके दांत चाटने लगा … उसे चाट रहा था भारती को चाट रहा था ..भारती एक दम मस्ती के आलम थी , उसने अपने आप को ढीला छोड़ दिया था .. मेरी बाँहों में … दोनों हांफ रहे थे .. भारती धीरे धीरे कराह रही थी ..अब मैंने अपने गीले और उसकी लार से भरी जीभ उसकी चूची की घुंडी पर घुमाने लगा , जो पहले से ही मस्ती में कड़क हो गया था ..भारती एक दम चीत्कार उठी ..”हाय राजा ..जानू … “उसका पूरा बदन सीहर उठा .कांप उठा .. मेरी जीभ के स्पर्श से .. उसकी घुंडी और भी टाईट हो गयी .. मेरी जीभ को भी उसका अहसास हुआ .. मैं अपना एक हाथ उसके पेट पर ले गया , सहलाने लगा , बड़े गुदाज़ थे … मेरी पूरी हथेली उसके मुलायम पेट को धीरे धीरे सहलाने लगी ..भारती उछल पड़ी ……”उई ..आह … क्या कर रहे हो मेरी जान ..मैं तो मस्ती में बिना चूदे ही मर जाऊंगी ..माआअ .. आः .. ” वोह हांफ रही थी .. और मैं उसकी घुंडी चूस रहा था ,,उसके पेट सहला रहा था , उसे जकड रखा था .. और उसने अभी भी मेरा लौड़ा थामे रखा था अपनी मुट्ठी में .. मस्ती में उसकी चमड़ी आगे पीछे कर रही थी … उसे बड़ा अच्छा लग रहा था ..मेरा लौड़ा सहलाना … मोटे और लम्बे लौड़े औरतों को थामने में बड़ा मजा आता है ..
हम दोनों मस्ती के भरपूर आलम में थे … मेरे लौड़े से लगातार पानी निकाल रहा था ..उसकी चूत का भी येही हाल था .. मेरी जांघें उसकी चूत के पानी से भींग गए थे …उसकी बेड़ की चादर गीली हो गयी थी …वो सिस्कारियां ले रही थी , हांफ रही थी ..कराह रही थी …आंखें बंद किये मंद मंद मुस्कुरा रही थी ..और मैं पागल हो रहा था ..’ पूरे बेड़ रूम में ‘ अआः ऊऊह्ह ..हाय ..माँ रे माँ ..का आलम था .. ”





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