Post Reply 
गाँव का मन्नू
18-07-2014, 05:48 AM
Post: #16
दोस्तों मैंने कहानी पोस्ट कर दी है अब आप लोग कहानी पढ़ के अपना रिप्लाई जरुर दे

Visit My Thread
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
21-07-2014, 12:47 AM
Post: #17
मन्नू तो एक तक अपनी मामी को देखे जा रहा था. उर्मिला देवी की नज़रे जैसे ही मन्नू से टकराई उनके मुँह से हँसी निकल गई. हस्ते हुए वो बोली "नई पॅंटी पहनी है ना इसलिए खुजली हो रही है". मन्नू अपनी चोरी पकड़े जाने पर शर्मिंदगी के साथ हस कर मुँह घुमा कर अपनी नज़रो को टीवी से चिपका दिया. उर्मिला देवी ने अपने पैरो को और ज़यादा फैला दिया. ऐसा करने से उनकी नाइटी नीचे की तरफ लटक गई थी. मन्नू के लिए ये बड़ा बढ़िया मौका था, उसने अपने हाथो में एक रब्बर की बॉल पकड़ी हुई थी जिसे उसने जान बूझ के नीचे गिरा दिया. बॉल लुढ़कता हुआ ठीक उस छ्होटे से टेबल के नीचे चला गया जिस पर मामी ने पैर रखे हुए थे. मन्नू "ओह" कहता हुआ उठा और टेबल के पास जाकर बॉल लेने के बहाने से लटकी हुए नाइटी के अंदर झाँकने लगा. एक तो नाइटी और उसके अंदर मामी ने पेटिकोट पहन रखा था, लाइट वाहा तक पूरी तरह से नही पहुच पा रही थी पर फिर भी मन्नू को मामी के मस्त जाँघो के दर्शन हो ही गये. उर्मिला देवी भी मन्नू के इस हरकत पर मन ही मन मुस्कुरा उठी. वो समझ गई की छ्होकरे के पॅंट में भी हलचल हो रही है और उसी हलचल के चक्कर में उनकी पॅंटी के अंदर झाँकने के चक्कर में पड़ा हुआ है. मन्नू बॉल लेकर फिर से सोफे पर बैठ गया तो उर्मिला देवी ने उसकी तरफ देखते हुए कहा

"अब इस रब्बर के बॉल से खलेने की तेरी उमर बीत गई, अब दूसरे बॉल से खेला कर". मन्नू थोड़ा सा शरमाते हुए बोला "और कौन सी बॉल होती है मामी, खलेने वाली सारी बॉल्स तो रब्बर से ही बनी होती है"

"हा, होती तो है मगर तेरे इस बॉल की तरह इधर उधर कम लुढ़कति है" कह कर फिर से मन्नू के आँखो के सामने ही अपनी चूत पर खुजली करके हस्ते हुए बोली "बड़ी खुजली सी हो रही है पता नही क्यों, शायद नई पॅंटी पहनी है इसलिए". मन्नू तो एक दम से गरम हो गया और एक टक जाँघो के बीच देखते हुए बोला

"पर मेरा अंडरवेर भी तो नया है वो तो नही काट रहा"

"अच्छा, तब तो ठीक है, वैसे मैने थोड़ी टाइट फिटिंग वाली पॅंटी ली है, हो सकता है इसलिए काट रही होगी"

"वा मामी आप भी कमाल करती हो इतनी टाइट फिटिंग वाली पॅंटी खरीदने की क्या ज़रूरत थी आपको"

"टाइट फिटिंग वाली पॅंटी हमारे बहुत काम की होती है, ढीली पॅंटी में परेशानी हो जाती है, वैसे तेरी परेशानी तो ख़तम हो गई ना"

"हा मामी, बिना अंडरवेर के बहुत परेशानी होती थी, सारे लड़के मेरा मज़ाक उरते थे".

"पर लड़कियों को तो अच्छा लगता होगा, क्यों?"

"हि मामी, आप भी नाआ,,,, "

"क्यों लड़कियाँ तुझे नही देखती क्या"

"लड़कियाँ मुझे क्यों देखेंगी, मेरे में ऐसा क्या है"

"तू अब जवान हो गया है, मर्द बन गया है"

"कहा मामी, आप भी क्या बात करती हो"

"अब जब अंडरवेर पहन ने लगा है तो इसका मतलब ही है की तू अब जवान हो गया है"

मन्नू इस पर एक दम से शर्मा गया,

"धात मामी,......”

" तेरा खड़ा होने लगा है क्या",

मामी की इस बात पर तो मन्नू का चेहरा एक्दुम से लाल हो गया. उसकी समझ में नही आ रहा था क्या बोले. तभी उर्मिला देवी ने अपनी नाइटी को एक्दुम घुटनो के उपर तक खीचते हुए बड़े बिंदास अंदाज़ में अपना एक पैर जो की टेबल पर रखा हुआ था उसको मन्नू के जाँघो पर रख दिया (मन्नू दरअसल पास के सोफे पर पालती मार के बैठा हुआ था.) मन्नू को एक्दुम से झटका सा लगा. मामी अपने गोरे गोरे पैरो की एडियों से उसके


जाँघो को हल्के हल्के दबाने लगी और एक हाथ को फिर से अपने जाँघो के बीच ले जा कर चूत को हल्के हल्के खुजलाते हुए बोली "क्यों मैं ठीक बोल रही हू ना"
"ओह मामी,"
"नया अंडरवेर लिया है, दिखा तो सही कैसा लगता है"

"अर्रे क्या मामी आप भी ना बस ऐसे........ अंडरवेर भी कोई पहन के दिखाने वाली चीज़ है"

"क्यों लोग जब नया कपड़ा पहनते है तो दिखाते नही है क्या" कह कर उर्मिला देवी ने अपने एडियों का दबाब जाँघो पर थोड़ा सा और बढ़ा दिया, पैर की उंगलिया से हल्के से पेट के निचले भाग को कुरेदा और मुस्कुरा के सीधे मन्नू की आँखो में झाँक कर देखती हुई बोली, "दिखा ना कैसा लगता है, फिट है या नही"

"छोड़ो ना मामी"

"अर्रे नये कपड़े पहन कर दिखाने का तो लोगो को शौक होता है और तू है की शर्मा रहा है, मैं तो हमेशा नये कपड़े पहनती हू तो सबसे पहले तेरे मामा को दिखाती हू, वही बताते है कि फिटिंग कैसी है या फिर मेरे उपर जचता है या नही, अभी तेरे मामा नही है........"

"पर मामी ये कौन सा नया कपड़ा है, अपने भी तो नई पॅंटी खरीदी है वो आप दिखाइएंगी क्या". उर्मिला देवी भी स्मझ गई की लड़का लाइन पर आ रहा है, और पॅंटी देखने के चक्कर में है. फिर मन ही मन खुद से कहा की बेटा तुझे तो मैं पॅंटी भी दिखौँगी और उसके अंदर का माल भी पर ज़रा तेरे अंडरवेर का माल भी तो देख लू नज़र भर के फिर बोली

"हा दिखौँगी ना तेरे मामा को तो मैं सारे कपड़े दिखाती हू"

"धात मामी.... तो फिर जाने दो मैं भी मामा को ही दिखौँगा"

"अर्रे तो इसमे शरमाने की क्या बात है, आज तो तेरे मामा नही है इसलिए मामी को ही दिखा दे,” और उर्मिला देवी ने अपने पूरे पैर को सरका कर उसके जाँघो के बीच में रख दिया जहा पर उसका लंड था. मन्नू का लंड खड़ा तो हो ही चुका था. उर्मिला देवी ने हल्के से लंड की औकात पर अपने पैर को चला कर दबाब डाला और मुस्कुरा कर मन्नू की आँखो में झाँकते हुए बोली "क्यों मामी को दिखाने में शर्मा रहा है क्या"

Visit My Thread
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
Post Reply 




User(s) browsing this thread: 1 Guest(s)
AMBA ANJALA DEVI LESBIANS MADHURI PATEL RANI RAKHA ZARINA SANDHIYA

Best Indian Adult Forum Free Desi Porn Videos XXX Desi Nude Pics Desi Hot Glamour Pics Indian Sex Website
Free Adult Image Hosting Indian Sex Stories Desi Adult Sex Stories Hindi Sex Kahaniya Tamil Sex Stories
Telugu Sex Stories Marathi Sex Stories Bangla Sex Stories Hindi Sex Stories English Sex Stories
Incest Sex Stories Mobile Sex Stories Porn Tube Sex Videos Desi Indian Sex Stories Sexy Actress Pic Albums

Contact Us | IndianSexStories.Club | Return to Top | Return to Content | Mobile Version | RSS Syndication