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दीपा मेडम
13-07-2014, 09:49 PM
Post: #6
वो कुछ सोचती जा रही थी। मैं उसके मन की उथल पुथल को अच्छी तरह समझ रहा था।
मैंने अगला तीर छोड़ा,”दीपा मेम साब, सच कहता हूँ अगर तुम थोड़ी देर नहीं चीखती या बोलती तो आज … तो बस ….?”
“बस … की ?” (बस क्या ?)
“वो … वो … छोड़ो … मधु को क्या हुआ वो क्यों नहीं आई ?” मैंने जान बूझ कर विषय बदलने की कोशिश की। क्या पता चिड़िया नाराज़ ही ना हो जाए।
“किउँ … मेरा आणा चंगा नइ लग्या ?” (क्या मेरा आणा अच्छा नहीं लगा ?)
“ओह… अरे नहीं बाबा वो बात नहीं है … मेरी साली साहिबा जी !”
“पता नहीं खाना खाने के बाद से ही उसे सरदर्द हो रहा था या बहाना मार रही थी सो गई और फिर सुधा दीदी ने मुझे आपको दूध पिला आने को कहा …”
“ओह तो पिला दो ना ?” मैंने उसके मम्मों (उरोजों) को घूरते हुए कहा।
“पर आप तो दूध की जगह मुझे ही पकड़ कर पता नहीं कुछ और करने के फिराक में थे ?”
“तो क्या हुआ साली भी तो आधी घरवाली ही होती है !”
“अई हई … जनाब इहो जे मंसूबे ना पालणा ? मैं पटियाला दी शेरनी हाँ ? इदां हत्थ आउन वाली नइ जे ?” (ओये होए जनाब इस तरह के मंसूबे मत पालना ? मैं पटियाला की शेरनी हूँ इस तरह हाथ आने वाली नहीं हूँ)
“हाय मेरी पटियाला की मोरनी मैं जानता हूँ … पता है पटियाला के बारे में दो चीजें बहुत मशहूर हैं ?”
“क्या ?”
“पटियाला पैग और पटियाला सलवार ?”
“हम्म … कैसे ?”
“एक चढ़ती जल्दी है और एक उतरती जल्दी है !”
“ओये होए … वड्डे आये सलवार लाऽऽन आले ?”
“पर मेरी यह शेरनी आधी गुजराती भी तो है ?” (दीपा गुजरात के अहमदाबाद शहर से एम बी ए कर रही है)
“तो क्या हुआ ?”
“भई गुजराती लड़कियाँ बहुत बड़े दिल वाली होती हैं। अपने प्रेमीजनों का बहुत ख़याल रखती हैं।”
“अच्छाजी … तो क्या आप भी जीजू के स्थान पर अब प्रेमीजन बनना चाहते हैं ?”
“तो इसमें बुरा क्या है?”
“जेकर ओस कोड़किल्ली नू पता लग गिया ते ओ शहद दी मक्खी वांग तुह्हानूं कट खावेगी ?” (अगर उस छिपकली को पता चल गया तो वो मधु मक्खी की तरह आपको काट खाएगी) वो मधुर की बात कर रही थी।
“कोई बात नहीं ! तुम्हारे इस शहद के बदले मधु मक्खी काट भी खाए तो कोई नुक्सान वाला सौदा नहीं है !” कहते हुए मैंने उसका हाथ पकड़ लिया।
मेरा अनुमान था वो अपना हाथ छुड़ा लेगी। पर उसने अपना हाथ छुड़ाने का थोड़ा सा प्रयास करते हुए कहा,”ओह … छोड़ो जीजू क्या करते हो … कोई देख लेगा … चलो दूध पी लो फिर मुझे जाना है !”
“मधु की तरह तुम अपने हाथों से पिला दो ना ?”
“वो कैसे … मेरा मतलब मधु कैसे पिलाती है मुझे क्या पता ?”
मेरे मन में तो आया कह दूं ‘अपनी नाइटी खोलो और इन अमृत कलशों में भरा जो ताज़ा दूध छलक रहा है उसे ही पिला दो’ पर मैंने कहा,”वो पहले गिलास अपने होंठों से लगा कर इसे मधुर बनाती है फिर मैं पीता हूँ !”
“अच्छाजी … पर मुझे तो दूध अच्छा नहीं लगता मैं तो मलाई की शौक़ीन हूँ !”
“कोई बात नहीं तुम मलाई भी खा लेना !” मैंने हंसते हुए कहा।
मुझे लगा चिड़िया दाना चुगने के लिए अपने पैर जाल की ओर बढ़ाने लगी है, उसने थर्मस खोल कर गिलास में दूध डाला और फिर गिलास मेरी ओर बढ़ा दिया।
“दीपा प्लीज तुम भी इस दूध का एक घूँट पी लो ना?”
“क्यों ?”
“मुझे बहुत अच्छा लगेगा !”
उसने दूध का एक घूँट भरा और फिर गिलास मेरी ओर बढ़ा दिया।
मैंने ठीक उसी जगह पर अपने होंठ लगाए जहां पर दीपा के होंठ लगे थे। दीपा मुझे हैरानी से देखती हुई मंद मंद मुस्कुराने लगी थी। किसी लड़की को प्रभावित करने के यह टोटके मेरे से ज्यादा भला कौन जानता होगा।
“वाह दीपा मेम साब, तुम्हारे होंठों का मधु तो बहुत ही लाजवाब है यार ?”
“हाय ओ रब्बा … हटो परे … कोई कल्ली कुंवारी कुड़ी दे नाल इहो जी गल्लां करदा है ?” (हे भगवान् हटो परे कोई अकेली कुंवारी लड़की के साथ ऐसी बात करता है क्या) वो तो मारे शर्म ले गुलज़ार ही हो गई।
“मैं सच कहता हूँ तुम्हारे होंठों में तो बस मधु भरा पड़ा है। काश ! मैं इनका थोड़ा सा मधु चुरा सकता !”
“तुमने ऐसी बातें की तो मैं चली जाउंगी !” उसने अपनी आँखें तरेरी।
“ओह … दीपा , सच में तुम्हारे होंठ और उरोज बहुत खूबसूरत हैं … पता नहीं किसके नसीब में इनका रस चूसना लिखा है।”
“जीजू तुम फिर ….? मैं जाती हूँ !”
वो जाने का कह तो रही थी पर मुझे पता था उसकी आँखों में भी लाल डोरे तैरने लगे हैं। बस मन में सोच रही होगी आगे बढ़े या नहीं। अब तो मुझे बस थोड़ा सा प्रयास और करना है और फिर तो यह पटियाला की शेरनी बकरी बनते देर नहीं लगाएगी।
“दीपा चलो दूध ना पिलाओ ! एक बार अपने होंठों का मधु तो चख लेने दो प्लीज ?”
“ना बाबा ना … केहो जी गल्लां करदे ओ … किस्से ने वेख लया ते ? होर फेर की पता होंठां दे मधु दे बहाने तुसी कुज होर ना कर बैठो ?” (ना बाबा ना … कैसी बातें करते हो किसी ने देख लिया तो ? और तुम क्या पता होंठों का मधु पीते पीते कुछ और ना कर बैठो)

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13-07-2014, 09:51 PM
Post: #7
“ओह … दीपा , सच में तुम्हारे होंठ और उरोज बहुत खूबसूरत हैं … पता नहीं किसके नसीब में इनका रस चूसना लिखा है।”
“जीजू तुम फिर ….? मैं जाती हूँ !”
वो जाने का कह तो रही थी पर मुझे पता था उसकी आँखों में भी लाल डोरे तैरने लगे हैं। बस मन में सोच रही होगी आगे बढ़े या नहीं। अब तो मुझे बस थोड़ा सा प्रयास और करना है और फिर तो यह पटियाला की शेरनी बकरी बनते देर नहीं लगाएगी।
“दीपा चलो दूध ना पिलाओ ! एक बार अपने होंठों का मधु तो चख लेने दो प्लीज ?”
“ना बाबा ना … केहो जी गल्लां करदे ओ … किस्से ने वेख लया ते ? होर फेर की पता होंठां दे मधु दे बहाने तुसी कुज होर ना कर बैठो ?” (ना बाबा ना … कैसी बातें करते हो किसी ने देख लिया तो ? और तुम क्या पता होंठों का मधु पीते पीते कुछ और ना कर बैठो)
अब मैं इतना फुद्दू भी नहीं था कि इस फुलझड़ी का खुला इशारा न समझता। मैंने झट से उठ कर दरवाजा बंद कर लिया।
और फिर मैंने उसे झट से अपनी बाहों में भर लिया। उसके कांपते होंठ मेरे प्यासे होंठों के नीचे दब कर पिसने लगे। वो भी मुझे जोर जोर से चूमने लगी। उसकी साँसें बहुत तेज़ हो गई थी और उसने भी मुझे कस कर अपनी बाहों में भींच लिया। उसके रसीले मोटे मोटे होंठों का मधु पीते हुए मैं तो यही सोचता जा रहा था कि इसके नीचे वाले होंठ भी इतने ही मोटे और रस से भरे होंगे।
वो तो इतनी उतावली लग रही थी कि उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी जिसे मैं कुल्फी की तरह चूसने लगा। कभी कभी मैं भी अपनी जीभ उसके मुँह में डाल देता तो वो भी उसे जोर जोर से चूसने लगती। धीरे धीरे मैंने अप एक हाथ से उसके उरोजों को भी मसलने लगा। अब तो उसकी मीठी सीत्कारें ही निकलने लगी थी। मैंने एक हाथ उसके वर्जित क्षेत्र की ओर बढाया तब वह चौंकी।
“ओह … नो … जीजू… यह क्या करने लगे … यह वर्जित क्षेत्र है इसे छूने की इजाजत नहीं है … बस बस … बस इस से आगे नहीं … आह … !”
“देखो तुम गुजरात में पढ़ती हो और पता है गांधीजी भी गुजरात से ही थे ?”
“तो क्या हुआ ? वो तो बेचारे अहिंसा के पुजारी थे?”
“ओह …. नहीं उन्होंने एक और बात भी कही थी !”
“क्या ?”
“अरे मेरी सोनियो … बेचारे गांधीजी ने तो यह कहा है कोई भी चूत अछूत नहीं होती !”
“धत्त … हाई रब्बा .. ? किहो जी गल्लां करदे हो जी ?” वो खिलखिला कर हंस पड़ी।
मैंने उसकी नाइटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर हाथ फिराना चालू कर दिया। उसने पेंटी नहीं पहनी थी। मोटी मोटी फांकों वाली झांटों से लकदक चूत तो रस से लबालब भरी थी।
“ऊईइ … माआआआ ……. ओह … ना बाबा … ना … मुझे डर लग रहा है तुम कुछ और कर बैठोगे ? आह …रुको … उईइ इ … …माँ …….!”
अब तो मेरा एक हाथ उसकी नाइटी के अन्दर उसकी चूत तक पहुँच गया। वो तो उछल ही पड़ी,”ओह … जीजू … रुको … आह …”
दोस्तो ! अब तो पटियाले की यह मोरनी खुद कुकडू कूँ बोलने को तैयार थी। मैं जानता था वो पूरी तरह गर्म हो चुकी है। और अब इस पटियाले के पटोले को (कुड़ी को) कटी पतंग बनाने का समय आ चुका है। मैंने उसकी नाइटी को ऊपर करते हुए अपना हाथ उसकी जाँघों के बीच डाल कर उसकी चूत की दरार में अपनी अंगुली फिराई और फिर उसके रस भरे छेद में डाल दी। उसकी चूत तो रस से जैसे लबालब भरी थी। चूत पर लम्बी लम्बी झांटों का अहसास पाते ही मेरा लण्ड तो झटके ही खाने लगा था।
एक बात तो आप भी जानते होंगे कि पंजाबी लड़कियाँ अपनी चूत के बालों को बहुत कम काटती हैं। मैंने कहीं पढ़ा था कि पंजाबी लोग काली काली झांटों वाली चूत के बहुत शौक़ीन होते हैं।
मैंने अपनी अंगुली को दो तीन बार उसके रसीले छेद में अन्दर-बाहर कर दिया।
“ओहो … प्लीज … छोड़ो मुझे … आह … रुको …एक मिनट …!” उसने मुझे परे धकेल दिया।
मुझे लगा हाथ आई चिड़िया फुर्र हो जायेगी। पर उसने झट से अपनी नाइटी निकाल फैंकी और मुझे नीचे धकेलते हुए मेरे ऊपर आ गई। मेरी कमर से बंधी लुंगी तो कब की शहीद हो चुकी थी। उसने अपनी दोनों जांघें मेरी कमर के दोनों ओर कर ली और मेरे लण्ड को हाथ में पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी। मुझे तो लगा मैं अपने होश खो बैठूँगा। मैंने उसे अपनी बाहों में जकड़ लेना चाहा।
“ओये मेरे अनमोल रत्तन रुक ते सईं … ?” (मेरे पप्पू थोड़ा रुको तो सही)
और फिर उसने मेरे लण्ड का सुपर अपनी चूत के छेद से लगाया और फिर अपने नितम्बों को एक झटके के साथ नीचे कर दिया। 7 इंच का पूरा लण्ड एक ही घस्से में अन्दर समां गया।
“ईईईईईईईईईईइ ….. या … !!”
कुछ देर वो ऐसे ही मेरे लण्ड पर विराजमान रही। उसकी आँखें तो बंद थी पर उसके चहरे पर दर्द के साथ गर्वीली विजय मुस्कान थिरक रही थी। और फिर उसने अपनी कमर को होले होले ऊपर नीचे करना चालू कर दिया। साथ में मीठी आहें भी करने लगी।
“ओह .. जीजू तुसी वी ना … इक नंबर दे गिरधारी लाल ई हो ?” (ओह जीजू तुम भी ना … एक नंबर के फुद्दू ही हो)
“कैसे ?”
“किन्नी देर टन मेरी फुद्दी विच्च बिच्छू कट्ट रये ने होर तुहानू दुद्द पीण दी पई है ?” (कितनी देर से मेरी चूत में बिच्छू काट रहे हैं और तुम्हें दूध पीने की पड़ी है।)
मैं क्या बोलता। मेरी तो उसने बोलती बंद कर दी थी।

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13-07-2014, 09:52 PM
Post: #8
“लो हूँण पी लो मर्ज़ी आये उन्ना दुद्ध !” (लो अब पी लो जितना मर्ज़ी आये दूध) कहते हए उसने अपने एक उरोज को मेरे होंठों पर लगा दिया और फिर नितम्बों से एक कोर का धक्का लगा दिया .
अब तो वो पूरी मास्टरनी लग रही थी। मैंने किसी आज्ञाकारी बालक की तरह उसके उरोजों को चूसना चालू कर दिया। वो आह … ओह्ह . करती जा रही थी। उसकी चूत तो अन्दर से इस प्रकार संकोचन कर रही थी कि मुझे लगा जैसे यह अन्दर ही अन्दर मेरे लण्ड को निचोड़ रही है। चूत के अन्दर की दीवारों का संकुचन और गर्मी अपने लण्ड पर महसूस करते हुए मुझे लगा मैं तो जल्दी ही झड़ जाऊँगा। मैं उसे अपने नीचे लेकर तसल्ली से चोदना चाहता था पर वो तो आह ऊँह करती अपनी कमर और मोटे मोटे नितम्बों से झटके ही लगाती जा रही थी। मैंने उसके नितम्बों पर हाथ फिरना चालू कर दिया। अब मैंने उसकी गाण्ड का छेद टटोलने की कोशिश की।
“आह… उईइ… इ … माँ ……. जीजू बहुत मज़ा आ रहा है … आह…”
“दीपा तुम्हारी चूत बहुत मजेदार है !”
“एक बात बताओ ?”
“क … क्या ?”
“तुमने उस छिपकली को पहली रात में कितनी बार रगड़ा था ?”
“ओह … 2-3 बार … पर तुम क्यों पूछ रही हो ?”
“हाई … ओ रब्बा ?”
“क्यों क्या हुआ ?”
“वो मधु तो बता रही थी .. आह … कि … कि … बस एक बार ही किया था ?”
‘साली मधु की बच्ची ’ मेरे मुँह से निकलते निकलते बचा। इतने में मेरी अंगुली उसकी गाण्ड के खुलते बंद होते छेद से जा टकराई। उसकी गाण्ड का छेद तो पहले से ही गीला और चिकना हो रहा था। मैंने पहले तो अपनी अंगुली उस छेद पर फिराई और फिर उसे उसकी गाण्ड में डाल दी। वो तो चीख ही पड़ी।
“अबे … ओये भेन दे टके … ओह … की करदा ए ( क्या करते हो … ?)”
“क्यों क्या हुआ ?”
“ओह … अभी इसे मत छेड़ो … ?”
“क्यों ?”
“क्या वो मधु मक्खी तुम्हें गाण्ड नहीं मारने देती क्या ?”
“ना यार बहुत मिन्नतें करता हूँ पर मानती ही नहीं !”
“इक नंबर दी फुदैड़ हैगी … ? नखरे करदी है … होर तुसी वि निरे नन्द लाल हो … किसे दिन फड़ के ठोक दओ” (एक नंबर क़ी चुदक्कड़ है वो … नखरे करती है .। ? तुम भी निरे लल्लू हो किसी दिन पकड़ कर पीछे से ठोक क्यों नहीं देते ?) कहते हुए उसने अपनी चूत को मेरे लण्ड पर घिसना शुरू कर दिया जैसे कोई सिल बट्टे पर चटनी पीसता है। ऐसा तो कई बार जब मधु बहुत उत्तेजित होती है तब वह इसी तरह अपनी चूत को मेरे लण्ड पर रगड़ती है।
“ठीक है मेरी जान … आह … !” मैंने कस कर उसे अपनी बाहों में भींच लिया। मैं अपने दबंग लण्ड से उसकी चूत को किरची किरची कर देना चाहता था। मज़े ले ले कर देर तक उसे चोदना चाहता था पर जिस तरीके से वह अपनी चूत को मेरे लण्ड पर घिस और रगड़ रही थी और अन्दर ही अन्दर संकोचन कर रही थी मुझे लगा मैं अभी शिखर पर पहुंच जाऊँगा और मेरी पिचकारी फूट जायेगी।
“आईईईईईईईईईईई … जीजू क्या तुम ऊपर नहीं आओगे ?” कहते हुए उसने पलटने का प्रयास किया।
मेरी अजीब हालत थी। मुझे लगा कि मेरे सुपारे में बहुत भारीपन सा आने लगा है और किसी भी समय मेरा तोता उड़ सकता है। मैं झट उसके ऊपर आ गया और उसके उरोजों को पकड़ कर मसलते हुए धक्के लगाने लगा। उसने अपनी जांघें खोल दी और अपने पैर ऊपर उठा लिए।
अभी मैंने 3-4 धक्के ही लगाए थे कि मेरी पिचकारी फूट गई। मैंने उसे कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया। वो तो चाह रही थी मैं जोर जोर से धक्के लगाऊं पर अब मैं क्या कर सकता था। मैं उसके ऊपर ही पसर गया।
“ओह … खस्सी परांठे … ?”

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13-07-2014, 09:53 PM
Post: #9
मेरी अजीब हालत थी। मुझे लगा कि मेरे सुपारे में बहुत भारीपन सा आने लगा है और किसी भी समय मेरा तोता उड़ सकता है। मैं झट उसके ऊपर आ गया और उसके उरोजों को पकड़ कर मसलते हुए धक्के लगाने लगा। उसने अपनी जांघें खोल दी और अपने पैर ऊपर उठा लिए।
अभी मैंने 3-4 धक्के ही लगाए थे कि मेरी पिचकारी फूट गई। मैंने उसे कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया। वो तो चाह रही थी मैं जोर जोर से धक्के लगाऊं पर अब मैं क्या कर सकता था। मैं उसके ऊपर ही पसर गया।
“ओह … खस्सी परांठे … ?”
मैंने अभी तक 5-7 लड़कियों और औरतों को चोद चुका था और मधु के साथ तो मेरा 30-35 मिनिट का रिकॉर्ड रहता है। पर अपने जीवन में आज पहली बार मुझे अपने ऊपर शर्मिंदगी का सा अहसास हुआ। हालांकि कई बार अधिक उत्तेजना में और किसी लड़की के साथ प्रथम सम्भोग में ऐसा हो जाता है पर मैंने तो सपने में भी ऐसा नहीं सोचा था। शायद इसका एक कारण यह भी था कि मैं पिछले 10-12 दिनों से भरा बैठा था और मेरा रस छलकने को उतावला था।
मैं उसके ऊपर से हट गया। वो आँखें बंद किये लेटी रही।
थोड़ी देर बाद वो भी उठ कर बैठ गई।”ओह … जीजू … तुम तो बहुत जल्दी आउट हो गए … मैं तो सोच रही थी कि सैंकड़ा (धक्कों का शतक) तो जरूर लगाओगे ?”
“ओह… सॉरी …. दीपा !”
“ओह …मेरे लटूरी दास मैं ते कच्ची भुन्नी ई रह गई ना ?” (मैं तो मजधार में ही रह गई ना)
“दीपा … पर कई बार अच्छे अच्छे बैट्स में भी जीरो पर आउट हो जाते हैं ?”
“यह क्यों नहीं कहते कि मेरी बालिंग शानदार थी ?” उसने हँसते हुए कहा।
“हाँ … दीपा वाकई तुम्हारी बालिंग बहुत जानदार थी …”
“और पिच ?”
“तुम्हारी तो दोनों ही पिचें (चूत और गाण्ड) एक दम झकास हैं … पर क्या दूसरी पारी का मौका नहीं मिलेगा?”
“जाओ जी … पहली पारी विच्च ते कुज कित्ता न इ हूँण दूजी पारी विच्च किहड़ा तीर मार लोवोगे ? किते एस वार वी क्लीन बोल्ड ना हो जाना ?” (जाओ जी पहली पारी में तो कुछ किया नहीं अब दूसरी पारी में कौन सा तीर मार लोगे कहीं इस बार भी क्लीन बोल्ड ना हो जाना)
“चलो लगी शर्त ?” कह कर मैंने उसे फिर से अपनी बाहों में भर लेना चाहा।
“ओके .. चलो मंजूर है … पर थोड़ी देर रुको मैं बाथरूम हो के आती हूँ।” कहते हुए वो बाथरूम की ओर चली गई।
बाथरूम की ओर जाते समय पीछे से उसके भारी और गोल मटोल नितम्बों की थिरकन देख कर तो मेरे दिल पर छुर्रियाँ ही चलने लगी। मैं जानता था पंजाबी लड़कियाँ गाण्ड भी बड़े प्यार से मरवा लेती हैं। और वैसे भी आजकल की लड़कियाँ शादी से पहले चूत मरवाने से तो परहेज करती हैं पर गाण्ड मरवाने के लिए अक्सर राज़ी हो जाती हैं। आप तो जानते ही हैं मैं गाण्ड मारने का कितना शौक़ीन हूँ। बस मधु ही मेरी इस इच्छा को पूरी नहीं करती थी बाकी तो मैंने जितनी भी लड़कियों या औरतों को चोदा है उनकी गाण्ड भी जरुर मारी है। इतनी खूबसूरत सांचे में ढली मांसल गाण्ड तो मैंने आज तक नहीं देखी थी। काश यह भी आज राज़ी हो जाए तो कसम से मैं तो इसकी जिन्दगी भर के लिए गुलामी ही कर लूं।
कोई दस मिनट के बाद वो बाथरूम से बाहर आई। मैं बिस्तर पर अपने पैर नीचे लटकाए बैठा था। वो मेरे पास आकर अपनी कमर पर हाथ रख कर खड़ी हो गई। मैंने उसकी कमर पकड़ कर उसे अपनी ओर खींच लिया। काली घुंघराली झांटों से लकदक चूत के बीच की गुलाबी फांकें तो ऐसे लग रही थी जैसे किसी बादल की ओट से ईद का चाँद नुदीपा हो रहा हो। उसकी चूत ठीक मेरे मुँह के सामने थी। एक मादक महक मेरी नाक में समां गई। लगता था उसने कोई सुगन्धित क्रीम या तेल लगाया था। मैंने उसकी चूत को पहले तो सूंघ और फिर होले से अपनी जीभ फिराने लगा। उसने मेरा सिर पकड़ लिया और मीठी सीत्कार करने लगी। जैसे जैसे मैं उसकी चूत पर अपनी जीभ फिरता वो अपने नितम्बों को हिलाने लगी और आह … ऊँह … उईइ … करने लगी।
हालांकि उसकी चूत की लीबिया (भीतरी कलिकाएँ) बहुत छोटी थी पर मैंने उन्हें अपने दांतों के बीच दबा लिया तो उत्तेजना के मारे उसकी तो चीख ही निकलते निकलते बची। उसने मेरा सिर पकड़ कर अपना एक पैर ऊपर उठाया और अपनी जांघ मेरे कंधे पर रख दी। इससे उसकी चूत की दरार और नितम्बों की खाई और ज्यादा खुल गई। मैं अब फर्श पर अपने पंजों के बल बैठ गया। मैंने एक हाथ से उसकी कमर पकड़ ली और दूसरा हाथ उसके नितम्बों की खाई में फिराने लगा। मुझे उसकी गाण्ड के छेड़ पर कुछ चिकनाई सी महसूस हुई। शायद उसने वहाँ भी कोई क्रीम जरुर लगाई थी। मेरा लण्ड तो इसी ख्याल से फिर से अकड़ने लगा। उसने मेरा सिर अपने हाथों में पकड़ कर बिस्तर के किनारे से लगा दिया और फिर पता नहीं उसे क्या सूझा, उसने अपना दूसरा पैर और दोनों हाथ बिस्तर पर रख लिए और फिर अपनी चूत को मेरे मुँह पर रगड़ने लगी।
“ईईईईईईईईईईईइ …….” उसकी कामुक किलकारी पूरे कमरे में गूँज गई।
और उसके साथ ही मेरे मुँह में शहद की कुछ बूँदें टपक पड़ी। मैं उसकी चूत को एक बार फिर से मुँह में भर लेना चाहता था पर इससे पहले कि मैं कुछ करता वो बिस्तर पर लुढ़क गई और अपने पेट के बल लेट कर जोर जोर से हांफने लगी।
अब मैं उठकर बिस्तर पर आ गया और उसके ऊपर आते हुए उसे कस कर अपनी बाहों में भर लिया। मेरा खूंटे की तरह खड़ा लण्ड उसके नितम्बों के बीच जा टकराया। मैंने अपने हाथ नीचे किये और उसके उरोजों को पकड़ कर मसलना चालू कर दिया। साथ में उसकी गर्दन और कानों के पास चुम्बन भी लेने लगा। कुंवारी गाण्ड की खुशबू पाते ही मेरा लण्ड तो उसमें जाने के लिए उछलने ही लगा था। मैंने अंदाज़े से एक धक्का लगा दिया पर लण्ड थोड़ा सा ऊपर की ओर फिसल गया। उसने अपने नितम्ब थोड़े से ऊपर उठा दिए और जांघें भी चौड़ी कर दी। मैंने एक धक्का और लगाया पर इस बार लण्ड नीचे की ओर फिसल कर चूत में प्रवेश कर गया।

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13-07-2014, 09:55 PM
Post: #10
मैंने अपने घुटनों को थोड़ा सा मोड़ लिया और फिर 4-5 धक्के और लगा दिए। दीपा तो आह… ऊँह … या रब्बा.. करती ही रह गई। जैसे ही मैं धक्का लगाने को होता वो अपने नितम्बों को थोडा सा और ऊपर उठा देती और फिच्च की आवाज के साथ लण्ड उसकी चूत में जड़ तक समां जाता। हम दोनों को मज़ा तो आ रहा था पर मुझे लगा उसे कुछ असुविधा सी हो रही है।
“जीजू … ऐसे नहीं ..!”
“ओह … दीपा बड़ा मज़ा आ रहा है … !”
“एक मिनट रुको तो सही.. मैं घुटनों के बल हो जाती हूँ।”
और फिर वो अपने घुटनों के बल हो गई। हमने यह ध्यान जरुर रखा कि लण्ड चूत से बाहर ना निकले। अब मैंने उसकी कमर पकड़ ली और जोर जोर से धक्के लगाने लगा। हर धक्के के साथ उसके नितम्ब थिरक जाते और उसकी मीठी सीत्कार निकलती। अब तो वह भी मेरे हर धक्के के साथ अपने नितम्बों को पीछे करने लगी थी। मैं कभी उसके नितम्बों पर थप्पड़ लगता कभी अपना एक हाथ नीचे करके उसकी चूत के अनार दाने को रगदने लगता तो वो जोर जोर आह ……… याआअ … उईईईईईईइ … रब्बा करने लगती।
अब मेरा ध्यान उसके गाण्ड के छेद पर गया। उस पर चिकनाई सी लगी थी और वो कभी खुलता कभी बंद होता ऐसे लग रहा था जैसे मेरी ओर आँख मार कर मुझे निमंत्रण दे रहा हो। मैंने अपने अंगूठे पर थूक लगाया और फिर उस खुलते बंद होते छेद पर मसलने लगा। मैंने दूसरे हाथ से नीचे उसकी चूत का अनारदाना भी मसलना चालू रखा। वो जोर जोर से अपने नितम्बों को हिलाने लगी थी। मुझे लगा वो फिर झड़ने वाली है। मैंने अपना अंगूठा उसकी गाण्ड के नर्म छेद में डाल दिया। छेद तो पहले से ही चिकना था और उत्तेजना के मारे ढीला सा हो गया था मेरा आधा अंगूठा अन्दर चला गया उस के साथ ही दीपा की किलकारी गूँज गई,”ऊईईईईईईई …. माँ ………… ओये … ओह … रुको …. !”
उसने मेरी कलाई पकड़ कर मेरा हाथ हटाने की कोशिश की पर मैंने अपने अंगूठे को दो तीन बार अन्दर बाहर कर ही दिया साथ में उसके दाने को भी मसलता रहा। और उसके साथ ही मुझे लगा मेरे लण्ड के चारों ओर चिकना लिसलिसा सा द्रव्य लग गया है। एक सित्कार के साथ दीपा धड़ाम से नीचे गिर पड़ी और मैं भी उसके ऊपर ही गिर पड़ा।
उसकी साँसें बहुत तेज़ चल रही थी और उसका शरीर कुछ झटके से खा रहा था। मैं कुछ देर उसके ऊपर ही लेता रहा। मेरा पानी अभी नहीं निकला था। मैंने फिर से एक धक्का लगाया।
“ओह … जीजू … अब बस करो … आह … और नहीं … बस …!”
“मेरी जान अभी तो अर्ध शतक भी नहीं हुआ ?”
“ओह … गोली मारो शतकाँ नूँ मेरी ते हालत खराब हो गई । आह … !” वो कसमसाने सी लगी। ऐसा करने से मेरा लण्ड फिसल कर बाहर आ गया और फिर वो पलट कर सीधी हो गई।
“इस बार तुमने मुझे कच्चा भुना छोड़ दिया …?” मैंने उलाहना देते हुए कहा।
“नहीं जीजू बस अब और नहीं … मैं बहुत थक गई हूँ … तुमने तो मेरी हड्डियाँ ही चटका दी हैं।”
“पर मैं इसका क्या करूँ ? यह तो ऐसे मानेगा नहीं ?” मैंने अपने तन्नाये (खड़े) लण्ड की ओर इशारा करते हुए कहा।
“ओह… कोई गल्ल नइ मैं इन्नु मना लेन्नी हाँ..?” उसने मेरे लण्ड को अपनी मुट्ठी में भींच लिया और उसे ऊपर नीचे करने लगी।
“दीपा ऐसे नहीं इसे मुँह में लेकर चूसो ना प्लीज ?”
“ओये होए मैं सदके जावां … मेरे गिरधारी लाल …?”
और फिर उसने मेरे लण्ड का टोपा अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। क्या कमाल का लण्ड चूसती है साली पूरी लण्डखोर लगती है ? उसके मुँह की लज्जत तो उसकी चूत से भी ज्यादा मजेदार थी।
मेरा तो मन करने लगा इसका सर पकड़ कर पूरा अन्दर गले तक ठोक कर अपना सारा माल इसके मुँह में ही उंडेल दूं पर मैंने अपना इरादा बदल लिया।
आप शायद हैरान हो रहे होंगे ? ओह…. दर असल मैं एक बार लगते हाथों उसकी गाण्ड भी मारना चाहता था। उसने कोई 4-5 मिनट ही मेरे लण्ड को चूसा होगा और फिर उसने मेरा लण्ड मुँह से बाहर निकाल दिया।
“जिज्जू मेरा तो गला भी दुखने लगा है !”
“पर तुमने तो शर्त लगाई थी ?”
“केहड़ी शर्त ?” (कौन सी शर्त)
“कि इस बार मुझे अपनी शानदार बोवलिंग से फिर आउट कर दोगी ?”
“ओह मेरी तो फुद्दी और गला दोनों दुखने लगे हैं ?”
“पर भगवान् ने लड़की को एक और छेद भी तो दिया है ?”
“कि मतलब ?”
“अरे मेरी चंपाकलि तुम्हारी गाण्ड का छेद भी तो एक दम पटाका है ?”
“तुस्सी पागल ते नइ होए ?”

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